रविंद्र वायकर की पहल पर केंद्र का कदम, कोकण रेल डबलिंग प्रक्रिया शुरू

*कोकण रेलवे के 263 किमी मार्ग के दोहरीकरण के लिए

विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू

*सांसद रविंद्र वायकर द्वारा लोकसभा में नियम 377 के तहत उठाए गए मुद्दे पर रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह का लिखित उत्तर

*10 फरवरी 2026 को लोकसभा में उठाया गया था मुद्दा.

 

मुंबई : (अलीम इनामदार)

कोकण रेलवे से यात्रा करने वालों के लिए राहत भरी खबर है, क्योंकि अब सफर और तेज होने की संभावना बन रही है। पूरे कोकण रेलवे मार्ग के दोहरीकरण के लिए केंद्र सरकार ने कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (केआरसीएल) ने मार्ग की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से लगभग 263 किलोमीटर के हिस्से के दोहरीकरण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह जानकारी रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह ने मुंबई उत्तर-पश्चिम लोकसभा क्षेत्र के सांसद रविंद्र वायकर को लिखित उत्तर में दी।

सांसद वायकर ने 10 फरवरी 2026 को लोकसभा में नियम 377 के तहत कोकण रेलवे के दोहरीकरण का मुद्दा उठाया था, जिसके जवाब में यह जानकारी दी गई।

कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड की स्थापना जुलाई 1990 में भारत के पश्चिमी तट पर महाराष्ट्र के रोहा से कर्नाटक के ठोकूर तक लगभग 740 किलोमीटर लंबे रेलवे मार्ग के निर्माण के लिए की गई थी। वर्तमान में केआरसीएल में भारत सरकार (रेल मंत्रालय) की 66.35% हिस्सेदारी है, जबकि महाराष्ट्र सरकार की 15.11%, कर्नाटक सरकार की 10.30%, गोवा सरकार की 4.12% और केरल सरकार की 4.12% हिस्सेदारी है। केआरसीएल का भारतीय रेलवे में विलय इन सभी भागीदार राज्यों की सहमति पर निर्भर करता है।

कोंकण रेलवे के कुल 740 किलोमीटर मार्ग में से रोहा–वीर और मडगांव–माजोर्डा खंड के लगभग 55 किलोमीटर हिस्से का दोहरीकरण पहले ही पूरा हो चुका है। शेष 685 किलोमीटर मार्ग की क्षमता बढ़ाने के लिए दोहरीकरण आवश्यक है, जिसके लिए बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत होगी। इसके लिए सभी भागीदार राज्य सरकारों की भागीदारी जरूरी बताई गई है।

रेल मंत्रालय ने संबंधित राज्य सरकारों से उनके हिस्से के अनुसार केआरसीएल के पूंजीगत खर्च में योगदान देने का अनुरोध किया है।

कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा 263 किलोमीटर मार्ग के दोहरीकरण के लिए डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिससे भविष्य में इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर यातायात और भी सुगम व तेज हो सकेगा।

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